नई दिल्ली 26 सितंबर 2026। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। कांग्रेस की ओर से उनके इस्तीफे की मांग के बीच अब NDA के तीन सहयोगी दलों के नेताओं ने भी चुनाव आयोग से SIR और आयोग के कामकाज को लेकर उठ रहे सवालों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। इनमें केंद्रीय मंत्री और LJP (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान, RLM अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और TDP के लोकसभा फ्लोर लीडर लावु श्रीकृष्ण देवरायालु शामिल हैं।
गौरतलब है कि ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के अनुसार, ये आपत्तियां नए मतदाताओं के पंजीकरण, वोटर लिस्ट से नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म-6 में बदलाव तथा मतदाता डेटाबेस के नियंत्रण जैसे मुद्दों से जुड़ी थीं। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों को अपनी जानकारी या सहमति के बिना जारी किए जाने पर सवाल उठाए थे।
इन आपत्तियों में मतदाता डेटा और आयोग के तकनीकी सिस्टम के केंद्रीकरण को लेकर भी चिंता जताई गई थी। इस रिपोर्ट और आपत्तियों की जानकारी सामने आने के बाद एक तरफ जहां विपक्ष पूरी तरह से हमलावर बना हुआ है, वहीं काकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग करते हुए बड़े आदोलन की चेतावनी दे दी है। इस पूरे मामले को लेकर जहां केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे है। वहीं अब बीजेपी के सहयोगी दलों ने भी इस पूरे मामले को लेकर अब सवाल उठा दिया है।
चिराग पासवान बोले- जनता के मन में भ्रम दूर करे आयोग
चिराग पासवान ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में किसी तरह का संदेह पैदा होना लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है। उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार से सार्वजनिक तौर पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। पासवान के मुताबिक, आयोग को किसी राजनीतिक दल को जवाब देने के बजाय सीधे जनता के मन में उठ रहे सवालों और भ्रम को दूर करना चाहिए। RLM प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने भी SIR विवाद पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले से जनता के बीच भ्रम की स्थिति बनी है और चुनाव आयोग को वास्तविक स्थिति सामने रखकर इसे दूर करना चाहिए।
TDP नेता लावु श्रीकृष्ण देवरायालु ने भी आयोग से स्पष्टीकरण की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और ऐसे में उठ रहे सवालों पर स्पष्टीकरण तथा पारदर्शिता जनता के भरोसे के लिए महत्वपूर्ण है। वहीं, चुनाव आयोग के सूत्रों ने इन रिपोर्टों के बाद स्पष्ट किया कि SIR समेत आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए हैं। आयोग ने कहा कि सदस्यों के बीच विचार-विमर्श के दौरान मतभेद या अलग-अलग राय होना प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
विपक्ष की मांग, BJP ने किया बचाव
रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने आयोग की कार्यप्रणाली और CEC की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, BJP की ओर से आयोग के भीतर अलग-अलग राय को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। इस पूरे विवाद के बीच अब खास बात यह है कि सिर्फ विपक्ष ही नहीं, NDA के सहयोगी दलों की ओर से भी चुनाव आयोग से सार्वजनिक स्पष्टीकरण की मांग सामने आई है। ऐसे में SIR और चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर चल रही राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत हैं।

No Comment! Be the first one.